जीआरपी प्रमुखों के आठवें राष्ट्रीय सम्मेलन में सुरक्षा और समन्वय पर जोर दिया गया
नई दिल्ली में जीआरपी प्रमुखों का आठवां अखिल भारतीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया, जिसमें यातायात पुलिसिंग में तकनीकी प्रगति और बलों के बीच समन्वय को और गहरा करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन का उद्देश्य देशभर में रेल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना था, और इसमें सूचना-आधारित पुलिसिंग पद्धतियों को अपनाने पर चर्चा की गई। इस बैठक में मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए एक समग्र रणनीति तैयार करने पर सभी राज्यों के प्रमुखों ने सहमति व्यक्त की।
सम्मेलन की मुख्य बातें
जीआरपी महानिदेशक ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भविष्य की रेल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सभी राज्यों को एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से पुलिसिंग की कार्यकुशलता में सुधार किया जा सकता है, और इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कई योजनाओं से सहयोग लिया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देना है। यह मास्टर प्लान रेलवे सुरक्षा तंत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
सम्मेलन में यह स्पष्ट किया गया कि जीआरपी और आरपीएफ दोनों ही रेल सुरक्षा के अभिन्न अंग हैं। इन दोनों बलों के बीच स्पष्ट नीतिगत समन्वय बनाने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम तैयार किया गया। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर काम करने के लिए एक सामान्य पाइपलाइन विकसित की जा रही है, ताकि आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
आसूचना आधारित पुलिस व्यवस्था पर जोर
सम्मेलन के मुख्य एजेंडा में से एक था सूचना-आधारित पुलिस व्यवस्था का विकास। यातायात पुलिसिंग में डेटा एनालिटिक्स का उपयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अब तक कई राज्यों ने अपने डेटाबेस को एकीकृत करना शुरू कर दिया है, लेकिन अभी भी कई राज्य ऐसे हैं जिन्हें तकनीकी सहायता की जरूरत है। इसके लिए केंद्रीय सरकार से और धनराशि और प्रौद्योगिकी सहायता की मांग की गई है।
जीआरपी-आरपीएफ समन्वय
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि जीआरपी और आरपीएफ के बीच एक ‘संचार चैंपियन’ नियुक्त किया जाएगा, जो दोनों बलों के बीच संवाद बनाए रखेगा और समन्वय सुनिश्चित करेगा। इससे आपराधिक गतिविधियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ के तहत भी कुछ पहलें की जा सकती हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यमियों को सशक्त बनाना और समृद्धि के नए द्वार खोलना है, और इससे रेलवे सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण में सुधार हो सकता है।
दिल्ली की सफाई अभियान से जुड़ा सन्देश
सम्मेलन के इतर दिल्ली में रिंग रोड पर सफाई और धूल नियंत्रण की समीक्षा भी की गई। एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें यह देखा गया कि शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए सफाई कार्यक्रम कैसे लागू किए जा सकते हैं। यह भी बताया गया कि यातायात पुलिसिंग में सुधार के लिए साफ-सुथरी सड़कें और वातावरण बनाना कितना महत्वपूर्ण है। यह सम्मेलन के एजेंडे से जुड़ा था क्योंकि दोनों ही मुद्दे यातायात सुरक्षा और प्रभावी पुलिसिंग के क्षेत्र में आते हैं।
सम्मेलन का सारांश: जीआरपी प्रमुखों का यह राष्ट्रीय सम्मेलन देशभर में रेल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। सूचना प्रौद्योगिकी, समन्वय और तकनीकी सहायता के माध्यम से एक ऐसी रणनीति तैयार की जाएगी जो भारतीय रेलवे को आने वाले दशकों में और सुरक्षित बनाए।
भविष्य की रेल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। सभी राज्यों के प्रमुखों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं—चाहे वह ‘गति शक्ति मास्टर प्लान’ हो या ‘रोजगार सृजन कार्यक्रम’—को रेल सुरक्षा में और अधिक उपयोग किया जा सकता है। यह सुनिश्चित किया गया कि सम्मेलन के निर्णयों का क्रियान्वयन जल्द से जल्द हो, ताकि यात्रियों की सुरक्षा में और सुधार हो सके।
सम्मेलन के बाद यह स्पष्ट हो गया कि भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी उन्नति, नीतिगत सुधार और बलों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। यह एक ऐसा कदम है जो यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम रेल यात्रा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कृपया जीआरपी प्रमुखों के राष्ट्रीय सम्मेलन की आधिकारिक समाचार पत्रिका देखें ताकि सम्मेलन से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके।
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