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विशेष अभियान 6.0: केंद्रीय रेशम बोर्ड ने हासिल की नई उपलब्धियां, रेशम उत्पादन को मिली नई गति

केंद्र सरकार के विशेष अभियान 6.0 के तहत वस्त्र मंत्रालय ने केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित किया है। यह अभियान सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटारे, रिकॉर्ड प्रबंधन और स्थान के इष्टतम उपयोग जैसे पहलुओं पर केंद्रित है। केंद्रीय रेशम बोर्ड ने इस अभियान के दौरान न केवल प्रशासनिक दक्षता में सुधार किया है, बल्कि रेशम उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

विशेष अभियान 6.0: एक नजर में

विशेष अभियान 6.0 केंद्र सरकार का एक प्रमुख प्रशासनिक सुधार कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति को बेहतर बनाना, लंबित शिकायतों का त्वरित निपटारा करना और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इस अभियान के तहत सभी मंत्रालयों और विभागों को विशिष्ट लक्ष्य दिए गए थे। वस्त्र मंत्रालय ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, विशेष रूप से केंद्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से।

केंद्रीय रेशम बोर्ड की प्रमुख उपलब्धियां

लंबित मामलों का रिकॉर्ड निपटारा

अभियान अवधि के दौरान केंद्रीय रेशम बोर्ड ने लंबित शिकायतों, आरटीआई आवेदनों, संसदीय आश्वासनों और अन्य प्रशासनिक मामलों के निपटारे में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। बोर्ड ने निर्धारित समयसीमा के भीतर लगभग शत-प्रतिशत लंबित मामलों का निपटारा किया, जो प्रशासनिक दक्षता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

स्वच्छता और कार्यालय प्रबंधन में सुधार

बोर्ड के देशभर में स्थित कार्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और फार्मों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया गया। पुराने और अनुपयोगी रिकॉर्ड्स का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा किया गया, जिससे बहुमूल्य कार्यालय स्थान मुक्त हुआ। डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली को मजबूत किया गया, जिससे कागज के उपयोग में भारी कमी आई और कार्य प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी।

राजस्व सृजन और संसाधन अनुकूलन

अभियान के दौरान कबाड़ सामग्री और अनुपयोगी संपत्तियों के निपटान से बोर्ड ने उल्लेखनीय राजस्व अर्जित किया। यह राशि रेशम विकास गतिविधियों में पुनर्निवेशित की जा रही है। इसी तरह की पहल राष्ट्रीय इस्पात निगम द्वारा भी की गई, जहां 150 भूखंडों की ऑनलाइन नीलामी से 366 करोड़ रुपये की वसूली हुई।

रेशम क्षेत्र पर प्रभाव: किसानों से निर्यात तक

रेशम उत्पादन में वृद्धि

प्रशासनिक सुधारों का सीधा असर क्षेत्रीय स्तर पर रेशम उत्पादन गतिविधियों पर पड़ा है। बोर्ड द्वारा विकसित उन्नत किस्मों के रेशमकीट और पौध सामग्री का वितरण अधिक सुव्यवस्थित हुआ है। इससे किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इनपुट मिलने लगे हैं, जिससे कोकून उत्पादकता में वृद्धि दर्ज की गई है।

किसानों की आय में वृद्धि

केंद्रीय रेशम बोर्ड की योजनाओं का लाभ सीधे रेशम किसानों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत किया गया है। डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सब्सिडी राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। यह पहल प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की भावना के अनुरूप है, जो उद्यमियों को सशक्त बनाने और समृद्धि के नए द्वार खोलने पर केंद्रित है।

निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार

गुणवत्तापूर्ण रेशम उत्पादन और प्रसंस्करण सुविधाओं के आधुनिकीकरण से भारतीय रेशम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है। बोर्ड द्वारा स्थापित गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली और ट्रेसेबिलिटी तंत्र ने वैश्विक खरीदारों का विश्वास जीता है।

तकनीकी नवाचार और अनुसंधान विकास

विशेष अभियान 6.0 के दौरान केंद्रीय रेशम बोर्ड ने अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को भी गति दी है। बोर्ड के वैज्ञानिकों ने जलवायु-लचीला रेशमकीट किस्में विकसित की हैं, जो तापमान उतार-चढ़ाव और बीमारियों के प्रति अधिक सहनशील हैं। इसके अलावा, मलबरी और गैर-मलबरी रेशम दोनों क्षेत्रों में मशीनीकरण और स्वचालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे श्रम निर्भरता कम हो रही है और उत्पादकता बढ़ रही है।

इस संदर्भ में तकनीक, संदर्भ और करुणा का समन्वय महत्वपूर्ण है, जैसा कि एमएनएस शताब्दी वैज्ञानिक सम्मेलन में भी रेखांकित किया गया था।

पर्यावरणीय स्थिरता और जैव विविधता

रेशम उत्पादन स्वाभाविक रूप से पर्यावरण-अनुकूल है, क्योंकि यह कार्बन पृथक्करण में योगदान देता है और ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाता है। केंद्रीय रेशम बोर्ड ने इस पारिस्थितिक लाभ को और बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण अभियान चलाए हैं। जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी बोर्ड के प्रयास सराहनीय हैं, जो राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के प्रयासों के पूरक हैं, जिसने 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 1.19 करोड़ रुपये वितरित किए हैं।

महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण रोजगार

रेशम क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पारंपरिक रूप से अधिक रही है। विशेष अभियान 6.0 के तहत बोर्ड ने महिला रेशम किसानों और रीलरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। कौशल विकास पहलों के माध्यम से महिलाओं को मूल्य संवर्धन गतिविधियों जैसे रेशम बुनाई, रंगाई, छपाई और डिजाइनिंग में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

भविष्य की राह: चुनौतियां और अवसर

उपलब्धियों के बावजूद, रेशम क्षेत्र के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। जलवायु परिवर्तन, कीट-रोग प्रकोप, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य अस्थिरता और सिंथेटिक फाइबर से प्रतिस्पर्धा प्रमुख चुनौतियां हैं। हालांकि, केंद्रीय रेशम बोर्ड की रणनीतिक योजना इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने पर केंद्रित है।

भविष्य की योजनाओं में शामिल हैं: उन्नत जीनोमिक्स और बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग कर रेशमकीट सुधार, प्रीसीजन सेरीकल्चर के लिए IoT और AI आधारित समाधान, रेशम अपशिष्ट से मूल्यवर्धित उत्पादों का विकास, और निर्यात बाजार विविधीकरण।

निष्कर्ष

विशेष अभियान 6.0 के तहत केंद्रीय रेशम बोर्ड की उपलब्धियां दर्शाती हैं कि प्रशासनिक सुधार कैसे जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। बोर्ड ने न केवल आंतरिक दक्षता में सुधार किया है, बल्कि रेशम मूल्य श्रृंखला के सभी हितधारकों – किसानों, रीलरों, बुनकरों, व्यापारियों और निर्यातकों – को लाभ पहुंचाया है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के दृष्टिकोण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है।

जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों की सेवा और समर्पण पर प्रकाश डालते हुए कहा था, सुशासन और प्रशासनिक दक्षता ही नए भारत की नींव हैं। केंद्रीय रेशम बोर्ड की यह सफलता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्रोत: PIB प्रेस विज्ञप्ति

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